चेक बाउंस हुआ तो भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई, एक छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी, जानिए नए सख्त नियम Cheque Bounce New Rules

By Vidya

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Cheque Bounce New Rules

Cheque Bounce New Rules:

आज के दौर में भले ही UPI, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल वॉलेट ने पैसों के लेन-देन को तेज और आसान बना दिया हो, लेकिन चेक की अहमियत अब भी कम नहीं हुई है। खासतौर पर बड़े कारोबारी लेन-देन, मकान या दुकान का किराया, ठेकेदारी भुगतान और प्रॉपर्टी से जुड़े सौदों में चेक को आज भी एक भरोसेमंद दस्तावेज माना जाता है। लेकिन यही चेक अगर बाउंस हो जाए, तो मामला सिर्फ असुविधा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह गंभीर कानूनी परेशानी में बदल सकता है। मौजूदा कानूनों के तहत चेक बाउंस को अपराध की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें सख्त सजा का प्रावधान है।

चेक बाउंस क्या होता है और यह क्यों गंभीर माना जाता है?

जब कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को भुगतान के लिए चेक देता है और वह चेक बैंक में जमा करने के बाद किसी कारणवश क्लियर नहीं हो पाता, तो उसे चेक बाउंस कहा जाता है। आमतौर पर लोग इसे छोटी या तकनीकी गलती मान लेते हैं, लेकिन कानून की नजर में यह एक दंडनीय अपराध है।

चेक बाउंस को गंभीर इसलिए माना जाता है क्योंकि यह भुगतान की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है। चेक लेने वाला व्यक्ति अपने काम, सामान या सेवा के बदले उस रकम पर भरोसा करता है। जब चेक क्लियर नहीं होता, तो उसे आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और समय की बर्बादी का सामना करना पड़ता है।

चेक बाउंस होने के प्रमुख कारण

चेक बाउंस होने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। सबसे आम कारण खाते में पर्याप्त बैलेंस का न होना है। इसके अलावा कई बार चेक पर किया गया हस्ताक्षर बैंक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता, जिससे चेक रिजेक्ट हो जाता है। तारीख में गलती, ओवरराइटिंग, चेक का फटा या खराब होना, स्टॉप पेमेंट का निर्देश, या खाता बंद होना भी चेक बाउंस के कारण बन सकते हैं।

यह जरूरी नहीं कि हर बार चेक बाउंस जानबूझकर किया गया हो, लेकिन कानून में इरादे से ज्यादा परिणाम को महत्व दिया जाता है। इसलिए अनजाने में हुई गलती भी कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकती है।

चेक बाउंस से जुड़े नए नियम और सजा का प्रावधान

चेक बाउंस के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार और न्यायपालिका ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का चेक बाउंस होता है और शिकायतकर्ता अदालत में मामला दर्ज करता है, तो दोषी पाए जाने पर आरोपी को दो साल तक की जेल की सजा हो सकती है।

इसके साथ ही अदालत आरोपी पर चेक की रकम का दोगुना तक जुर्माना भी लगा सकती है। कई मामलों में जुर्माने के साथ-साथ मुआवजा देने का आदेश भी दिया जाता है। यदि आरोपी बार-बार अदालत के आदेशों की अनदेखी करता है, तो उसकी गिरफ्तारी भी संभव है।

चेक बाउंस पर कानूनी प्रक्रिया कैसे शुरू होती है?

अगर आपके पास आया चेक बाउंस हो जाता है, तो सीधे अदालत जाने से पहले कुछ कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है। सबसे पहले, चेक बाउंस होने की जानकारी मिलने के 30 दिनों के भीतर आपको चेक जारी करने वाले व्यक्ति को एक कानूनी नोटिस भेजना होता है। इस नोटिस में साफ तौर पर यह बताया जाता है कि चेक बाउंस हो गया है और संबंधित राशि का भुगतान 15 दिनों के भीतर किया जाए।

अगर नोटिस मिलने के बाद भी 15 दिनों के अंदर भुगतान नहीं किया जाता, तो शिकायतकर्ता को अगले 30 दिनों के भीतर अदालत में मामला दर्ज करने का अधिकार होता है। तय समय-सीमा का पालन न करने पर मामला कमजोर पड़ सकता है या खारिज भी हो सकता है।

क्या पहली बार चेक बाउंस होने पर भी सजा हो सकती है?

यह एक आम गलतफहमी है कि पहली बार चेक बाउंस होने पर सजा नहीं होती। वास्तव में, कानून में पहली या दूसरी बार का कोई अलग प्रावधान नहीं है। अगर अदालत को लगता है कि अपराध के सभी तत्व पूरे होते हैं, तो पहली बार में भी सजा सुनाई जा सकती है। हालांकि, कई मामलों में अदालत परिस्थितियों को देखते हुए समझौते या जुर्माने का विकल्प भी देती है।

चेक बाउंस से बचने के लिए जरूरी सावधानियां

चेक बाउंस से बचना पूरी तरह आपके नियंत्रण में होता है, बशर्ते आप थोड़ी सावधानी बरतें। चेक जारी करने से पहले हमेशा यह सुनिश्चित करें कि आपके खाते में पर्याप्त बैलेंस मौजूद हो। अगर आप पोस्ट-डेटेड चेक दे रहे हैं, तो उस तारीख तक खाते में जरूरी रकम बनाए रखें।

चेक भरते समय साफ-सुथरा चेक इस्तेमाल करें, तारीख स्पष्ट लिखें और हस्ताक्षर वही करें जो बैंक रिकॉर्ड में दर्ज हों। ओवरराइटिंग या कटिंग से बचें, क्योंकि इससे चेक रिजेक्ट हो सकता है। अगर किसी कारण से भुगतान रोकना जरूरी हो, तो सामने वाले को समय रहते सूचित करें और वैकल्पिक भुगतान का तरीका अपनाएं।

डिजिटल भुगतान के बावजूद चेक की जिम्मेदारी क्यों जरूरी है?

भले ही डिजिटल पेमेंट तेज और सुविधाजनक हों, लेकिन चेक अब भी एक कानूनी दस्तावेज की तरह माना जाता है। चेक पर किया गया हस्ताक्षर आपके भुगतान के वादे का प्रमाण होता है। इसलिए इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। थोड़ी सी लापरवाही न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि आपकी सामाजिक छवि और मानसिक शांति पर भी असर डाल सकती है।

निष्कर्ष

चेक बाउंस कोई मामूली गलती नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी अपराध है, जिसके परिणामस्वरूप जेल, जुर्माना और लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। सही जानकारी और सतर्कता अपनाकर इस परेशानी से आसानी से बचा जा सकता है। समय पर भुगतान, सही विवरण और जिम्मेदारी से किया गया लेन-देन आपको कानूनी झंझटों से दूर रख सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी प्रकार की कानूनी सलाह न माना जाए। किसी भी कानूनी समस्या की स्थिति में योग्य वकील या अधिकृत विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होगा।

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