February Weather Update: फरवरी और मार्च के मौसम को लेकर किसानों और आम लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। खासकर ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश को लेकर चिंता बनी रहती है, क्योंकि इसका सीधा असर फसलों और दैनिक जीवन पर पड़ता है। हालिया मौसमी आकलन के अनुसार, आने वाले दो से तीन महीनों में मौसम का मिज़ाज सामान्य से अलग रहने वाला है, लेकिन राहत की बात यह है कि बड़े स्तर पर ओलावृष्टि या भारी बेमौसम बारिश की आशंका बेहद कम जताई जा रही है।
महाराष्ट्र में बारिश का पूर्वानुमान
तीन महीने के मौसमी पूर्वानुमान के मुताबिक जनवरी, फरवरी और मार्च के दौरान महाराष्ट्र में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से काफी कम रहने की संभावना है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में शुष्क मौसम बना रह सकता है। केवल दक्षिणी महाराष्ट्र के कुछ जिलों में हल्की-फुल्की बारिश की संभावना जताई गई है, लेकिन यह मात्रा भी बहुत सीमित रहने वाली है।
लातूर, धाराशिव, नांदेड, सांगली और कोल्हापुर जैसे जिलों में कहीं-कहीं कुछ मिलीमीटर बारिश हो सकती है। हालांकि इतनी कम बारिश से न तो खेतों में ज्यादा नमी बनेगी और न ही मौसम में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इसी कारण विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में अगले दो से ढाई महीनों तक ओलावृष्टि की स्थिति बनने की संभावना लगभग नहीं के बराबर है।
ओलावृष्टि क्यों नहीं बन रही है?
ओलावृष्टि के लिए वातावरण में कुछ खास परिस्थितियों का होना जरूरी होता है, जैसे पर्याप्त नमी, तेज़ ऊपर की ओर उठती हवाएं और बादलों का गहराई तक विकसित होना। मौजूदा हालात इन शर्तों को पूरा नहीं कर रहे हैं।
पिछले नवंबर और दिसंबर में भी राज्य के कई हिस्सों में बारिश नहीं हुई थी। जनवरी का महीना भी लगभग सूखा ही रहा है। जब लंबे समय तक नमी की कमी बनी रहती है, तो ओलावृष्टि जैसे घटनाक्रम के लिए जरूरी ऊर्जा वातावरण में इकट्ठा नहीं हो पाती। यही वजह है कि मौजूदा ठंड का मौसम ओलावृष्टि के अनुकूल नहीं माना जा रहा।
‘ला नीना’ का असर और लंबी ठंड
इस साल वैश्विक स्तर पर ‘ला नीना’ प्रभाव सक्रिय बताया जा रहा है। आमतौर पर ला नीना के दौरान ठंड का मौसम लंबा खिंच जाता है और तापमान अपेक्षाकृत कम बना रहता है। यही कारण है कि फरवरी के अंत और मार्च के शुरुआती दिनों तक भी ठंड और शीतलहर का असर महसूस किया जा सकता है।
अनुमान है कि मार्च के पहले सप्ताह तक कई इलाकों में सुबह-शाम ठंड बनी रहेगी। रात के तापमान में भी अचानक बढ़ोतरी की संभावना कम है। इसका सीधा मतलब यह है कि मौसम धीरे-धीरे बदलेगा, किसी एक दिन में तेज़ गर्मी नहीं पड़ेगी।
उत्तर भारत से आ रही ठंड का प्रभाव
इस समय उत्तर भारत, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड दर्ज की जा रही है। इन क्षेत्रों में सक्रिय ठंडी हवाओं का असर महाराष्ट्र के सीमावर्ती जिलों तक साफ तौर पर पहुंच रहा है।
गोंदिया, गढ़चिरौली, भंडारा, नागपुर, अमरावती और जलगांव जैसे जिलों में रात और सुबह के समय ठंड ज्यादा महसूस की जा रही है। 15 जनवरी के बाद भी तापमान में किसी बड़ी छलांग की संभावना नहीं जताई जा रही है। यानी ठंड का यह सिलसिला कुछ समय तक यूं ही जारी रह सकता है।
बादल आएंगे, लेकिन बारिश कम
आने वाले दिनों में दो-तीन दिन ऐसे हो सकते हैं जब आसमान में बादल छाए रहें। इससे कुछ इलाकों में हल्की नमी महसूस हो सकती है, लेकिन इससे व्यापक बारिश या ओलावृष्टि होने की उम्मीद नहीं है। बादलों के बावजूद ठंड का असर कम नहीं होगा, बल्कि कई बार ऐसे हालात में रात का तापमान और गिर जाता है।
इसलिए लोगों को यह नहीं मानना चाहिए कि बादल दिखते ही मौसम अचानक बदल जाएगा। मौजूदा संकेत बताते हैं कि मौसम स्थिर रहेगा और किसी बड़े तूफानी सिस्टम के बनने की संभावना नहीं है।
किसानों के लिए क्या संकेत हैं?
किसानों के लिहाज से यह मौसम कई मायनों में राहत भरा है। रबी की फसलों के लिए ठंडा और शुष्क मौसम आमतौर पर अनुकूल माना जाता है। गेहूं, चना, सरसों जैसी फसलों को इस समय अत्यधिक बारिश या ओलावृष्टि से नुकसान होता है, लेकिन मौजूदा पूर्वानुमान के अनुसार ऐसी किसी बड़ी नकारात्मक मौसमी घटना की आशंका नहीं है।
कम बारिश का मतलब यह भी है कि किसानों को सिंचाई की योजना पहले से बनाकर रखनी होगी, लेकिन फसल को अचानक होने वाले नुकसान का खतरा कम रहेगा। ठंड का लंबा दौर कई रबी फसलों की गुणवत्ता के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
आने वाले हफ्तों में सतर्कता जरूरी
हालांकि मौसम बड़े स्तर पर स्थिर रहने की संभावना है, फिर भी किसानों और आम लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए। कभी-कभी छोटे स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जैसे सुबह घना कोहरा, पाला पड़ना या अचानक ठंडी हवाएं चलना।
फिलहाल फरवरी और मार्च के लिए जो संकेत मिल रहे हैं, वे यही बताते हैं कि ओलावृष्टि और भारी बेमौसम बारिश का खतरा बहुत कम है। ठंड का असर कुछ और समय तक बना रह सकता है और धीरे-धीरे मार्च के अंत तक मौसम गर्मी की ओर बढ़ेगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, आने वाले दो से तीन महीनों का मौसम महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों के लिए अपेक्षाकृत शांत रहने वाला है। बारिश की कमी, ठंड का लंबा दौर और ओलावृष्टि की न्यूनतम संभावना—ये सभी संकेत किसानों और आम जनता के लिए राहत देने वाले हैं। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो रबी की फसलों को अच्छा लाभ मिल सकता है और मौसम से जुड़ी बड़ी परेशानियों से बचाव संभव होगा।










