Prayagraj School Holiday Update: उत्तर प्रदेश में सर्दी का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, वहीं प्रयागराज में धार्मिक आयोजनों का दौर भी जोरों पर है. ऐसे में छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है. मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम क्षेत्र में उमड़ने वाली भारी भीड़ और उससे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्रयागराज जिले के सभी स्कूलों को कुछ दिनों के लिए बंद रखने का आदेश जारी किया गया है. यह निर्णय सीधे तौर पर बच्चों की सुरक्षा और शहर की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है.
मौनी अमावस्या के दौरान क्यों लिया गया स्कूल बंदी का फैसला
मौनी अमावस्या प्रयागराज का सबसे प्रमुख और विशाल धार्मिक स्नान पर्व माना जाता है. इस अवसर पर देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान के लिए पहुंचते हैं. इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण शहर की सड़कों पर जबरदस्त भीड़, लंबा ट्रैफिक जाम और सुरक्षा व्यवस्था पर भारी दबाव बन जाता है.
हर साल यह देखा जाता है कि इस दौरान:
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मुख्य मार्गों और संपर्क सड़कों पर घंटों जाम लगता है
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सार्वजनिक परिवहन प्रभावित होता है
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भीड़ नियंत्रण और कानून व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बन जाती है
ऐसे हालात में बच्चों का स्कूल आना-जाना जोखिम भरा हो सकता है. इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एहतियातन स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया है.
किन तारीखों तक बंद रहेंगे स्कूल
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रयागराज जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूल 16 जनवरी से 20 जनवरी तक बंद रहेंगे. इस आदेश में कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के सभी छात्र शामिल हैं. स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इन तारीखों के दौरान कोई भी स्कूल नहीं खोला जाएगा.
यह आदेश जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा जिलाधिकारी के निर्देश पर जारी किया गया है और इसे सख्ती से लागू करने के लिए शिक्षा विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है.
आदेश का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल इस आदेश का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. शिक्षा विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी स्कूल तय अवधि तक बंद रहें.
इस फैसले से यह संकेत मिलता है कि प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा.
स्कूल बंद रखने के पीछे मुख्य कारण क्या हैं
मौनी अमावस्या को उत्तर भारत का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक स्नान पर्व माना जाता है, जबकि पहला स्थान मकर संक्रांति को दिया जाता है. इस दिन श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है, जिससे पूरे शहर की व्यवस्था प्रभावित होती है.
प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
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अत्यधिक भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा जाती है
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स्कूल जाने वाले मार्गों पर भारी जाम की स्थिति बनती है
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बच्चों के साथ किसी अप्रिय घटना की संभावना बढ़ जाती है
प्रशासन का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी बड़ी दुर्घटना को टाल सकती है. इसी सोच के तहत स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद रखने का फैसला लिया गया है.
डीएम के निर्देश: बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
जिलाधिकारी ने आदेश में स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसी वजह से यह निर्णय लिया गया है, भले ही यह बंदी कुछ दिनों के लिए ही क्यों न हो. आदेश में यह भी कहा गया है कि:
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कोई भी स्कूल तय तारीख से पहले नहीं खोला जाएगा
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सभी शिक्षण संस्थानों को पहले ही इस निर्णय की जानकारी दे दी गई है
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धार्मिक आयोजन के दौरान यह कदम बेहद आवश्यक है
प्रशासन का मानना है कि इस तरह के फैसले भविष्य में भी मिसाल बन सकते हैं.
अभिभावकों से प्रशासन की अपील
स्कूल बंदी के साथ-साथ प्रशासन ने अभिभावकों से भी सहयोग की अपील की है. उनसे कहा गया है कि वे इस अवधि में बच्चों को घर पर ही रखें और अनावश्यक रूप से भीड़भाड़ वाले इलाकों में न जाने दें.
प्रशासन की ओर से दी गई सलाह में शामिल है:
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बच्चों को घर के अंदर सुरक्षित रखें
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संगम क्षेत्र और मुख्य मार्गों से दूरी बनाए रखें
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घर पर ही पढ़ाई और आराम का समय दें
यह समय परिवार के साथ बिताने और बच्चों को सुरक्षित माहौल देने का भी अच्छा अवसर हो सकता है.
स्कूल दोबारा कब से खुलेंगे
प्रशासन के अनुसार, सभी स्कूल 21 जनवरी 2026 से अपने निर्धारित समय पर फिर से खुल जाएंगे. उस दिन से शिक्षण कार्य सामान्य रूप से शुरू हो जाएगा. यह स्पष्ट किया गया है कि स्कूल बंदी केवल मौनी अमावस्या और उससे जुड़े दिनों में बढ़ी भीड़ को देखते हुए की गई है.
एक जिम्मेदार और दूरदर्शी प्रशासनिक कदम
प्रयागराज प्रशासन का यह फैसला यह दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान केवल आयोजन ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों और खासकर बच्चों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है. भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और कानून व्यवस्था जैसे पहलुओं पर संतुलित सोच के साथ लिया गया यह निर्णय सराहनीय माना जा रहा है.
बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना, जोखिम को पहले ही पहचान लेना और समय रहते कदम उठाना — यही इस पूरे फैसले का मूल उद्देश्य है. आने वाले समय में भी इस तरह के निर्णय प्रशासनिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का उदाहरण बन सकते हैं.









