Heavy Rainfall Alert: जनवरी का महीना अपने साथ कड़ाके की ठंड, कोहरा और पाले की चुनौती लेकर आता है। लेकिन इस बार मौसम एक नया मोड़ लेने जा रहा है। हालिया मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार आने वाले दिनों में उत्तर भारत के कई हिस्सों में ठंड से कुछ राहत मिलने वाली है, वहीं दूसरी ओर बारिश और पहाड़ों में बर्फबारी का सिलसिला शुरू हो सकता है। यह बदलाव आम लोगों के साथ-साथ किसानों के लिए भी काफी अहम साबित होगा।
ठंड और पाले से मिलेगी राहत
अब तक उत्तर भारत में ठंडी हवाओं और पाले ने जनजीवन को काफी प्रभावित किया है। सुबह और रात के समय तापमान में तेज गिरावट के कारण खेतों में खड़ी फसलों पर भी असर पड़ा है। लेकिन 16 जनवरी के बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिलेगा। हवाओं का रुख बदलने के साथ ही दक्षिण-पश्चिमी हवाएं सक्रिय होंगी, जो अरब सागर से नमी लेकर आएंगी। इसका सीधा असर न्यूनतम तापमान पर पड़ेगा और रात की ठंड में कुछ कमी महसूस की जा सकेगी।
इस बदलाव का एक सकारात्मक पहलू यह है कि पाले की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है। जिन इलाकों में सब्जियां, आलू, सरसों और अन्य रबी फसलें पाले से प्रभावित हो रही थीं, वहां किसानों को थोड़ी राहत मिलेगी।
पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी का लंबा दौर
16 से 23 जनवरी तक सक्रिय रहेगा पश्चिमी प्रभाव
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में मौसम ज्यादा सक्रिय होने वाला है। 16 जनवरी से पहाड़ों पर बर्फबारी का एक लंबा सिलसिला शुरू होने की संभावना है, जो लगभग 23 जनवरी तक जारी रह सकता है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में अच्छी बर्फबारी देखने को मिल सकती है।
इस बर्फबारी से पहाड़ों में ठंड तो बढ़ेगी, लेकिन इसका असर मैदानी इलाकों के मौसम पर भी पड़ेगा। बर्फबारी के बाद ठंडी हवाएं मैदानी क्षेत्रों की ओर बढ़ेंगी, जिससे कुछ समय के लिए ठंड दोबारा महसूस हो सकती है।
मैदानी इलाकों में बारिश का अलर्ट
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान पर असर
मैदानी इलाकों के लिए सबसे अहम खबर बारिश को लेकर है। 19 या 20 जनवरी के आसपास पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों में बादल सक्रिय हो सकते हैं और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। यह बारिश धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश तक पहुंच सकती है।
बारिश का यह दौर सर्दियों के मौसम में काफी मायने रखता है। एक ओर जहां इससे प्रदूषण और धूल-धुएं में कमी आ सकती है, वहीं दूसरी ओर ठंड का असर कुछ समय के लिए बढ़ भी सकता है।
मध्य भारत और महाराष्ट्र में तापमान में बढ़ोतरी
सर्दी से मिलेगी आंशिक राहत
मध्य भारत और महाराष्ट्र के इलाकों में फिलहाल ठंड का असर बना हुआ है, लेकिन अगले दो-तीन दिनों के बाद यहां तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। दिन के समय धूप तेज होगी और रात की ठंड भी पहले के मुकाबले कम महसूस की जाएगी।
यह बदलाव खासतौर पर उन किसानों के लिए राहत भरा होगा, जो लगातार ठंड और पाले के कारण फसलों को लेकर चिंतित थे। हालांकि तापमान बढ़ने के साथ-साथ नमी और कोहरे की स्थिति पर भी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
दक्षिण भारत में मौसम रहेगा शांत
बारिश की गतिविधियों में कमी
दक्षिण भारत में फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत स्थिर रहने वाला है। यहां बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी और अधिकांश इलाकों में आसमान साफ रहेगा। तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के कई हिस्सों में ठंडी हवाओं का असर धीरे-धीरे कम होगा और मौसम सामान्य होने लगेगा।
यह स्थिति कृषि कार्यों के लिए अनुकूल मानी जा सकती है, क्योंकि लगातार बारिश के कारण जो रुकावटें आ रही थीं, वे कम होंगी।
छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में ठंड का असर
कुछ दिनों तक बनी रहेगी सर्दी
छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में अगले दो-तीन दिनों तक ठंड का असर बना रह सकता है। सुबह और रात के समय तापमान कम रहेगा, जिससे ठिठुरन महसूस होगी। हालांकि इसके बाद इन इलाकों में भी मौसम में सुधार की संभावना है और तापमान धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट सकता है।
किसानों के लिए क्या है खास संदेश
खेती के लिहाज से फायदेमंद हो सकती है बारिश
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बारिश खेती के लिए कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। रबी फसलों के लिए यह बारिश प्राकृतिक सिंचाई का काम करेगी, जिससे गेहूं, चना, सरसों जैसी फसलों की बढ़वार बेहतर हो सकती है।
हालांकि इसके साथ-साथ सावधानी बरतना भी जरूरी है। अत्यधिक नमी से कुछ फसलों में रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
22–23 जनवरी के बाद फिर बदल सकता है मौसम
एक अहम बात यह भी है कि बारिश के बाद 22 या 23 जनवरी से फिर से कोहरा और ठंड का नया दौर शुरू हो सकता है। इसका मतलब यह है कि ठंड पूरी तरह से विदा नहीं हुई है। इसलिए किसानों और आम लोगों को मौसम के इस उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
फसलों की सुरक्षा, पशुओं की देखभाल और दैनिक कार्यों की योजना मौसम को ध्यान में रखकर बनाना आने वाले दिनों में सबसे समझदारी भरा कदम होगा।
निष्कर्ष
आने वाले दिन मौसम के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हैं। जहां एक ओर ठंड और पाले से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर बारिश और बर्फबारी का दौर भी शुरू होने वाला है। यह बदलाव न केवल मौसम को संतुलित करेगा, बल्कि खेती और पर्यावरण के लिए भी असरदार साबित हो सकता है। जरूरत है तो बस सतर्क रहने की, ताकि मौसम के इस बदलते मिज़ाज का सही तरीके से सामना किया जा सके।










