1 जनवरी से जमीन और मकान रजिस्ट्री के नियम बदले, खरीदार–विक्रेता दोनों पर असर, जानिए पूरा असर Land Registry Update 2026

By Vidya

Published On:

Land Registry Update 2026

Land Registry Update 2026: भारत में प्रॉपर्टी से जुड़े कानून लंबे समय से पारिवारिक विवादों, बुजुर्गों की उपेक्षा और महिलाओं के अधिकारों को लेकर चर्चा में रहे हैं। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2026 से भूमि और मकान से संबंधित नियमों में व्यापक संशोधन लागू कर दिए हैं। इन नए प्रावधानों का उद्देश्य संपत्ति से जुड़े मामलों को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और सरल बनाना है, ताकि आम नागरिकों को लंबे कानूनी झंझटों से राहत मिल सके।

सरकारी योजना, जॉब न्युज के लिये JOIN
Join Now
सरकारी योजना, जॉब न्युज के लिये JOIN
Join Now

जमीन, मकान, दुकान या प्लॉट—चाहे कोई भी अचल संपत्ति हो—अब उसकी रजिस्ट्री, हस्तांतरण और बंटवारे की प्रक्रिया पहले से काफी अलग और स्पष्ट हो गई है। खासतौर पर बुजुर्ग माता-पिता, बेटियों और भूमि मालिकों के हितों को इन बदलावों में प्राथमिकता दी गई है।

नीचे 2026 से लागू हुए संपत्ति कानूनों के सबसे अहम नियमों को विस्तार से समझते हैं।

यह भी पढ़े:
Wage Hike 2026 केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, अब सभी मजदूरों को मिलेगी 3 गुना सैलरी, जानिए नई सैलरी कितनी बढ़ी Wage Hike 2026

माता-पिता की उपेक्षा करने पर संपत्ति वापस लेने का अधिकार

भारतीय समाज में अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता अपनी जीवन भर की कमाई से बनाई गई संपत्ति बच्चों के नाम कर देते हैं, लेकिन बाद में वही बच्चे उनकी देखभाल से पीछे हट जाते हैं। इस सामाजिक समस्या को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने कानून को और सख्त बनाया है।

गिफ्ट की गई संपत्ति वापस ली जा सकेगी

यदि माता-पिता ने अपनी संपत्ति बच्चों को गिफ्ट डीड के जरिए दी है और बच्चे उनकी देखभाल नहीं कर रहे हैं, तो माता-पिता उस संपत्ति को कानूनी रूप से वापस लेने का दावा कर सकते हैं। यह प्रावधान बुजुर्गों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करता है।

बेदखली का भी अधिकार

मेंटेनेंस और वेलफेयर से जुड़े कानूनों के तहत अब ट्रिब्यूनल को यह अधिकार भी है कि वह लापरवाह बच्चों को माता-पिता के घर से बाहर निकालने का आदेश दे सके। इससे बुजुर्गों के सम्मान और अधिकारों को मजबूती मिलती है।

यह भी पढ़े:
January School Holiday 24 से 28 जनवरी तक लगातार 5 दिन स्कूल बंद, बच्चों और अभिभावकों की हुई मौज January School Holiday

पिता की स्व-अर्जित संपत्ति पर बेटे का सीमित अधिकार

संपत्ति को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम बेटे के अधिकारों को लेकर रहता है। नए नियमों में इस विषय को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है।

स्व-अर्जित संपत्ति पर पिता का पूरा अधिकार

यदि किसी पिता ने अपनी मेहनत और कमाई से संपत्ति खरीदी है, तो उसे स्व-अर्जित संपत्ति माना जाएगा। ऐसी संपत्ति पर बेटा तब तक कोई कानूनी दावा नहीं कर सकता, जब तक पिता जीवित हैं।

घर में रहने की अनुमति भी शर्तों पर

बेटा माता-पिता के घर में केवल उनकी अनुमति से ही रह सकता है। यदि माता-पिता किसी कारणवश यह अनुमति वापस ले लेते हैं, तो बेटे को घर खाली करना होगा, चाहे वह विवाहित हो या अविवाहित।

यह भी पढ़े:
School Holiday Update 24 से 28 जनवरी तक लगातार 5 दिन बंद रहेंगे स्कूल, सच्चाई क्या है, जानिए पूरा फैक्ट चेक School Holiday Update

भाइयों के बीच जमीन बंटवारे की नई व्यवस्था

संयुक्त संपत्ति का बंटवारा भारतीय परिवारों में विवाद का सबसे बड़ा कारण रहा है। इसे आसान बनाने के लिए सरकार ने प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाया है।

सहमति की बाध्यता समाप्त

अब यदि कोई सह-स्वामी संयुक्त जमीन में से अपना हिस्सा अलग कराना चाहता है, तो उसे बाकी भाइयों या हिस्सेदारों की सहमति की आवश्यकता नहीं होगी। वह सीधे संबंधित प्राधिकरण के पास आवेदन देकर अपना हिस्सा अलग करवा सकता है।

डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से पारदर्शिता

जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण कर दिया गया है, जिससे फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी की संभावना कम हो गई है। इससे बंटवारे की प्रक्रिया तेज और भरोसेमंद बनी है।

यह भी पढ़े:
CNG Price Today आज सुबह चौंका देने वाली बात, मिली अच्छी खबर, CNG की नई कीमतें जारी, जानिए आपके शहर में क्या हुआ बदलाव CNG Price Today

बेटियों के संपत्ति अधिकार और दामाद की स्थिति

महिलाओं के अधिकारों को लेकर यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब कानून बेटियों को पूरी तरह बराबरी का दर्जा देता है।

शादी के बाद भी बेटियों का अधिकार

बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के समान अधिकार प्राप्त हैं। विवाह के बाद भी बेटी का अपने मायके की संपत्ति पर अधिकार खत्म नहीं होता। यह नियम महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करता है।

दामाद का कोई स्वतः अधिकार नहीं

दामाद का ससुराल की संपत्ति पर कोई कानूनी अधिकार नहीं माना जाएगा, जब तक कि संपत्ति कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके नाम ट्रांसफर न की गई हो। इससे पारिवारिक संपत्ति को लेकर भ्रम और विवाद कम होंगे।

यह भी पढ़े:
IMD Weather Update भारी बारिश और तूफान का खतरा, अगले 7 दिन का ताजा मौसम पूर्वानुमान IMD Weather Update

जमीन अधिग्रहण में मुआवजा और पुनर्वास के सख्त नियम

सरकारी परियोजनाओं जैसे सड़क, रेलवे या औद्योगिक विकास के लिए जमीन अधिग्रहण हमेशा विवाद का विषय रहा है। नए कानूनों में भूमि मालिकों के हितों को विशेष सुरक्षा दी गई है।

बिना मुआवजा नहीं होगी बेदखली

अब किसी भी व्यक्ति को उसकी जमीन से तब तक बेदखल नहीं किया जा सकता, जब तक उसे पूरा और उचित मुआवजा न दिया जाए। मुआवजे की राशि बाजार मूल्य के अनुरूप तय की जाएगी।

पुनर्वास पर विशेष ध्यान

जिन परिवारों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी, उनके पुनर्वास और आजीविका की व्यवस्था को कानून का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। इससे प्रभावित लोगों को नई शुरुआत का अवसर मिलेगा।

यह भी पढ़े:
School Winter Vacation Extended भीषण ठंड का कहर, 25 जनवरी तक स्कूलों की छुट्टियां बढ़ीं, बच्चों और अभिभावकों को बड़ी राहत School Winter Vacation Extended

निष्कर्ष

1 जनवरी 2026 से लागू हुए ये नए प्रॉपर्टी कानून भारतीय संपत्ति व्यवस्था में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव हैं। इन नियमों से जहां बुजुर्गों को सम्मान और सुरक्षा मिलेगी, वहीं बेटियों को बराबरी का अधिकार और भूमि मालिकों को न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित होगा।

यदि आपके नाम कोई अचल संपत्ति है या आप भविष्य में संपत्ति खरीदने या हस्तांतरित करने की योजना बना रहे हैं, तो इन नए नियमों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। सही जानकारी आपको कानूनी विवादों से बचा सकती है और आपके अधिकारों की रक्षा कर सकती है। ये बदलाव न केवल कानून को मजबूत बनाते हैं, बल्कि समाज में जिम्मेदारी, समानता और पारदर्शिता को भी बढ़ावा देते हैं।

यह भी पढ़े:
February Weather Update फरवरी और मार्च में कहर बरपाएगा मौसम, कई राज्यों में ओलावृष्टि का रेड अलर्ट जारी February Weather Update

Related Posts

Leave a Comment