Mustard Oil Price Drop 2026: भारतीय रसोई में सरसों तेल की अहम भूमिका किसी से छिपी नहीं है। लगभग हर घर में इसका रोज़ाना उपयोग किया जाता है, चाहे सब्ज़ी बनानी हो, तड़का लगाना हो या पारंपरिक व्यंजन तैयार करने हों। बीते कुछ समय से सरसों तेल की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही थीं, जिससे आम परिवारों का बजट बिगड़ने लगा था। लेकिन अब साल 2026 की शुरुआत में सरसों तेल की कीमतों में अचानक आई भारी गिरावट ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। इस गिरावट से न सिर्फ घरेलू उपभोक्ताओं को फायदा हुआ है, बल्कि छोटे दुकानदारों, ढाबा संचालकों और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री को भी राहत मिली है।
सरसों तेल की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
सरसों तेल के दाम घटने के पीछे कई अहम आर्थिक और कृषि से जुड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में आई कमी को माना जा रहा है। बीते कुछ महीनों में सोयाबीन तेल, पाम ऑयल और सूरजमुखी तेल जैसे प्रमुख खाद्य तेलों के भाव वैश्विक स्तर पर नीचे आए हैं। जब ये तेल सस्ते होते हैं, तो भारतीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है और इसका सीधा असर सरसों तेल की कीमतों पर पड़ता है।
सरकारी नीतियों का भी दिखा असर
सरकार द्वारा हाल ही में लागू की गई कुछ नीतियों ने भी सरसों तेल की कीमतों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई है। केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों और व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट लागू की है, जिसके तहत वे तय सीमा से अधिक भंडारण नहीं कर सकते। इससे जमाखोरी पर लगाम लगी है और बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बनने से रोका गया है। जब सप्लाई नियमित बनी रहती है, तो कीमतों में स्थिरता आती है और उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलता है।
नई फसल की आवक से बढ़ी सप्लाई
सरसों तेल की कीमतों में गिरावट का एक और बड़ा कारण देश के कई राज्यों में नई सरसों फसल की बुवाई और कटाई का शुरू होना है। राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे प्रमुख सरसों उत्पादक राज्यों में इस समय बाजारों में ताज़ी सरसों की आवक बढ़ रही है। जब सरसों बीज की उपलब्धता अधिक होती है, तो तेल मिलों में उत्पादन भी बढ़ता है। उत्पादन बढ़ने से बाजार में सप्लाई बढ़ जाती है और इसका नतीजा कीमतों में गिरावट के रूप में सामने आता है।
अलग-अलग शहरों में सरसों तेल के ताज़ा भाव
देश के प्रमुख शहरों में सरसों तेल के दामों में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। नीचे कुछ बड़े शहरों के ताज़ा भाव दिए गए हैं, जिससे साफ़ पता चलता है कि कीमतें अब धीरे-धीरे सामान्य स्तर की ओर लौट रही हैं।
दिल्ली
दिल्ली में सरसों तेल का वर्तमान भाव लगभग 145 रुपये प्रति लीटर चल रहा है, जबकि पहले यही तेल 165 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा था। यानी यहां करीब 20 रुपये प्रति लीटर की कमी आई है।
जयपुर
जयपुर में सरसों तेल की कीमत घटकर 142 रुपये प्रति लीटर के आसपास पहुंच गई है। पहले यहां 160 रुपये प्रति लीटर तक दाम थे, जिससे उपभोक्ताओं को लगभग 18 रुपये प्रति लीटर की राहत मिली है।
पटना
पटना में सरसों तेल के दामों में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली है। यहां वर्तमान भाव करीब 140 रुपये प्रति लीटर है, जो पहले 162 रुपये प्रति लीटर था। यानी लगभग 22 रुपये प्रति लीटर की कमी दर्ज की गई है।
लखनऊ
लखनऊ में भी सरसों तेल अब 143 रुपये प्रति लीटर के आसपास मिल रहा है, जबकि पहले इसका दाम 163 रुपये प्रति लीटर तक था। यहां करीब 20 रुपये प्रति लीटर की गिरावट आई है।
भोपाल
भोपाल में सरसों तेल का भाव घटकर लगभग 146 रुपये प्रति लीटर हो गया है। पहले यह 168 रुपये प्रति लीटर तक बिक रहा था, यानी यहां भी करीब 22 रुपये प्रति लीटर की कमी आई है।
अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में भी आई गिरावट
केवल सरसों तेल ही नहीं, बल्कि अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में भी हाल के दिनों में कमी देखी गई है। सोयाबीन तेल, सूरजमुखी तेल और पाम ऑयल के दामों में लगभग 5 से 8 रुपये प्रति लीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है। इन तेलों के सस्ते होने का असर पूरे खाद्य तेल बाजार पर पड़ा है और ग्राहकों को पहले की तुलना में कम कीमत पर तेल उपलब्ध हो रहा है।
किन कंपनियों ने घटाए अपने दाम?
भारत में पैकेज्ड सरसों तेल बेचने वाली कई बड़ी कंपनियों ने भी अपने दामों में कटौती की है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बाजार की स्थिति को देखते हुए Fortune, Dhara, Ruchi Gold, Gemini जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने पैक्ड सरसों तेल के रेट घटा दिए हैं। इससे उपभोक्ताओं को ब्रांडेड तेल भी अब कुछ हद तक सस्ते दामों पर मिलने लगे हैं।
आम जनता को कैसे होगा सीधा फायदा?
सरसों तेल और अन्य खाद्य तेलों के सस्ते होने का सबसे बड़ा फायदा सीधे आम लोगों को मिलेगा। रसोई का खर्च कम होने से मासिक बजट पर दबाव घटेगा। मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवार, जो पहले महंगे तेलों के कारण परेशान थे, अब कुछ राहत महसूस करेंगे। होटल, ढाबा और छोटे खाने-पीने के व्यवसाय भी कम लागत में खाना तैयार कर पाएंगे, जिससे उनके मुनाफे में सुधार हो सकता है।
इसके अलावा, जब खाद्य तेल सस्ते होते हैं तो महंगाई पर भी कुछ हद तक नियंत्रण आता है। रोज़मर्रा के खर्च कम होने से लोगों की जेब पर बोझ घटता है और वे अन्य ज़रूरतों पर भी खर्च कर पाते हैं। कुल मिलाकर, सरसों तेल की कीमतों में आई यह गिरावट देशभर के उपभोक्ताओं के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
आगे क्या रह सकती है कीमतों की स्थिति?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों के दाम स्थिर रहते हैं और देश में सरसों की आवक अच्छी बनी रहती है, तो आने वाले समय में कीमतों में और स्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि मौसम, वैश्विक मांग और सरकारी नीतियों जैसे कारक आगे भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल, सरसों तेल के सस्ते होने से देशभर के घरों में राहत का माहौल है। लोग अब कम कीमत में बेहतर गुणवत्ता का तेल खरीद पा रहे हैं, जो निश्चित रूप से आम जनता के लिए एक अच्छी खबर है।










